जागरूक बच्चा:
रुको गंदगी दादा! अब नहीं चलेगा तेरा अत्याचार।
(लापरवाह नागरिक को) भैया, आपने छिलका यहाँ क्यों फेंका? गली के कोने पर तो डस्टबिन रखा है।
लापरवाह नागरिक:
छोड़ो ना बच्चा, सब करते हैं। मुझसे अकेले क्या होगा?
स्वच्छता दीदी:
नहीं, गलत सोच है आपकी।
(जोर से) एक व्यक्ति, एक कदम, एक बदलाव - हम सब मिलकर लाएँगे सुधार।
गंदगी सिर्फ बीमारी नहीं, ये गरीबी की सहेली है।
स्वच्छता से ही आती है हेल्थ, वेल्थ और खेली!
गंदगी दादा: (हंसकर)
हा हा, तुम लोगों को स्वच्छता पसंद है? देखूँ कैसे करते हो।
(लापरवाह नागरिक से) तू ही बता, पिछले हफ्ते तूने गटर के पास कूड़ा तो फेंका था?
लापरवाह नागरिक: (शर्म से) अरे... वो... सुबह जल्दी थी।
बच्चा:
भैया, जब आपको डेंगू हुआ था, तब डॉक्टर ने क्या कहा था?
"आपके घर के आसपास पानी जमा था, मच्छर पैदा हुए।"
अब भी वही कर रहे हैं!
लापरवाह नागरिक: (सिर पीटते हुए)
हाय, सच कहा तूने। मेरा बेटा भी बीमार हुआ था। मुझे माफ करो।
(सुबह का दृश्य – पार्क की बेंच, कूड़ेदान के पास ही गंदगी फैली) Nukkad Natak Script In Hindi On Cleanliness Pdf 20
रमेश (चिप्स का पैकेट फेंकता हुआ): अरे यार, कूड़ेदान दूर पड़ा है। यहीं फेंक देता हूँ।
सुमन (आती हुई): रुकिए भाई साहब! कूड़ेदान यहाँ है, फिर भी गंदगी?
रमेश: तुम कौन होती हैं सिखाने वाली? सब करते हैं।
सुमन: गलत को गलत कहना हर किसी का काम है।
(मुन्नी आती है, केले का छिलका फिसलने से गिर जाती है)
मुन्नी (रोते हुए): ऊँ… किसने छिलका फेंका?
चाचा (आते हुए): बेटा, यही होता है गंदगी का नतीजा। चोट लगती है, बीमारी फैलती है।
A street play performed in public places with minimal props, loud expressions, social message, and audience interaction.
(Ganpati, the drunkard, falls into a drain covered with plastic.)
Ganpati: Bachao! Yahan ek plastic ne mera pair phansa diya. Yeh plastic walo ne toh drainage system hi khatam kar diya.
(Kids enter – Chunnu, Munnu, Gappu. They start crying.)
Chunnu: Mummy ne kaha, agar park saaf nahi hua toh hum match nahi khel sakte. A street play performed in public places with
Suthra Lal: Dekha Gandagi Das? Tumhari wajah se yeh bachhe nahi khel sakte. Tumhari wajah se Ganpati drain mein gira.
Gandagi Das (suddenly serious): Main... maine kabhi socha nahi.
Suthra Lal: Ab socho. Ek insaan agar thookta hai, toh 1000 log beemar padte hain. Ek packet chips zameen pe phenkta hai, toh woh 400 saal tak soil ko kharab karta hai.
(Gandagi Das breaks down. He picks up a broom.)
Gandagi Das: Maafi mujhe. Aaj se main Gandagi Das nahi, Swachhata Das hoon.
गंदगी दादा: (गुस्से से)
ये बच्चा तो खतरनाक है! (बच्चे की ओर हाथ बढ़ाता है)
स्वच्छता दीदी (झाड़ू तानकर):
पीछे हट गंदगी दादा!
अब पूरा गाँव/शहर जाग चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा - "स्वच्छ भारत मिशन"
हर घर में टॉयलेट, हर गली में डस्टबिन,
अब तू नहीं टिकने वाला यहाँ। हर गली में डस्टबिन
सूत्रधार + सभी:
(तेज संगीत पर सब मिलकर गंदगी दादा को घेर लेते हैं। वह डरकर भागने लगता है)
गंदगी दादा:
हाय मार डाला! बचाओ - बचाओ!
लेकिन... तुम्हारी ही गंदगी है मेरी ताकत। अगर तुमने कचरा नहीं फेंका तो मैं मर जाऊँगा।
लापरवाह नागरिक: (अब संकल्पित)
तो फिर आज से मैं कसम खाता हूँ -
बच्चा:
और हम सब मिलकर हर रविवार को गली साफ करेंगे।
कहानी एक छोटे शहर/मुहल्ले की है जहाँ लोग कचरा सड़कों पर फेंकते हैं, नालियाँ बंद होती हैं और बीमारी फैलती है। एक स्कूल के बच्चे, सफाईकर्मी और एक चंचल स्थानीय नेता मिलकर स्वच्छता अभियान चलाते हैं—आख़िरकार सशक्त सामुदायिक भागीदारी से मोहल्ला बदल जाता है। नाटक में संवाद, गीत, और दर्शक-इंटरेक्शन शामिल हैं जिससे संदेश गहरा और यादगार बनता है।
विषय: स्वच्छता अभियान (Cleanliness) शीर्षक: गंदगी से आज़ादी अवधि: 12-15 मिनट (बढ़ाकर 20 मिनट किया जा सकता है) पात्र (5-7 लोग):
На сайте используются cookies.
Продолжая использовать сайт, вы принимаете условия
Специалист уже ищет
для вас лучшие варианты!
Благодарим вас за обращение!
Специалист уже ищет
для вас лучшие варианты!
Специалист уже ищет
для вас лучшие варианты!
Специалист уже ищет
для вас лучшие варианты!
Модель добавлена в избранное
перейтиМодель добавлена в сравнение
перейти